श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ मुंबई का गठन 30 नवम्बर 1982 में विशेष परिणितीयान उस समय स्थानकवासी समान के पास धर्म साधना करने हेतु न कोई स्थान था न सन्त मतियों के वर्षावास हेतु स्थानक था समाज के कतिपय सदस्यों के दिमाग में विचार पैदा हुआ कि क्यों न हमारे समान का एक संगठन हो और प्रामा जीजा स्थान हो । जहाँ पर बैठकर धर्य क्रियायें की जा सके और साधु सन्तो के चतुर्मास कराये जा सके। इसी विचार । व्यापकता ली और एस. के. रेक्सटाईल कालबादेवी पर मेवाड के रहने वालों की, जिसमें मुख्य रूप से श्री मोतीलालजी सा कोठारी, श्री भीमरानजी कथारा, पारसमलनी सुराणा, शांतीलालजी राठौड, शंकरलालजी कोठारी, नेमीचन्दजी बोहरा के सानिध्य में मिटींग ली गई। यह प्रथम प्रयास था। इस बारे में कुछ समय तक विचार विमर्श होता रहा । कुछ समय में सभी मेवाड़ वासियों से सम्पर्क किया गया तथा सब की राय बनी की मेवाड का एक संगठन बनाया जाए जिसका नाम मेवाड़ संघ रखा जावे। संयोग से सन 1983 में श्रमण संघीय महामंत्री श्री सौभाग्यमुनिजी म.सा. टाणा-1 महासतीजी प्रेमवती जी म.सा ठाणा 5.मुंबई महानगरी में पधार गये। इन्ही के सानिध्य में पूरा कार्यक्रम किया गया। मेवाड़ संघ के सदस्य बनान राम किये गये देखते देखते 400 सदस्यों का एक संघठन बन गया। महामंत्री जी के सानिध्य में फोर्ट मे कार्यवाहक कार्यकारिणी का गठन किया गया जिसमें संरक्षक मोतीलालजी सा. कोठारी, प्रमुख श्री भीमराजजी कच्छारा, अध्यक्ष श्री मीठालालजी सिंघवी, मंत्री श्री शंकरलालजी कोनारी अर्थमंत्री श्री पारसमलजी सुराणा एवं 5 सदस्य बनाये गये। इस कार्यकारिणी के जिम्मे वर्षावास की रूपरेखा बनाना एवं वर्षावास के स्थान का चयन करना भी था। वर्षावास हेतू स्थान का चयन नेमाणीवाडी, ठाकुरद्वार में तय किया गया। महासतीयांजी के लिये रंगलालजी कोठारी गजपुर वालों के निवासस्थान पर तय हुआ। निर्धारित समय पर वर्षावास हेतु प्रवेश हुआ। वर्षावास के समय महामंत्रीजी के सानिध्य में संगठन की पूर्ण रूपोखा बनाकर सभी सदस्यों के समक्ष रखी गई। 1) मेवाड़ संघ मुंबई का संवेधानिक गठन 2) बृहन मुंबई में उपसंघों का गठन 3) धार्मिक क्रियाएँ हेतु साधना सदनों का निर्माण 4) सदस्यता अभियान 5) मुंबई निर्देशिका बनाना
सभी सदस्यों ने इन्हें उत्साहपूर्वक स्वीकार किया और कार्य में जुट गये। बहुत विचार विमर्श के बाद श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ (मेवाड़) मुंबई का गठन हआ तभी संघ ने यह निश्चय किया था कि मुंबई के विविध स्थानों पर ऐसे धर्म स्थानकों का निर्माण किया जाये जहाँ बच्चो को हिंदी माध्यम से धर्म ज्ञान कराया जा सके। पुस्तकालय आदि का संचालन हो सके तथा संघ की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक प्रवृत्तियों का पनपने का अवसर मिल सके। उसके अनुरुप साधना सदनों का निर्माण किया गया। जिसकी संख्या करीब 11 पहुँच चुकी है । और बाकी उपसंघों में तैयारीयां चल रही है । जहाँ साधना सदन हैं वह वर्षावास के साथ ही धार्मिक क्रियाएँ निरंतर चलती हैं। इसी प्रक्रिया में मुंबई निर्देशिका का भी कार्यक्रम प्रारंभ किया तथा यह तिसरी निर्देशिका बनकर तैयार है जो कुछ समय मे आपके हाथ में पहुचने वाली है। आज यह संघ विराट वटवृक्ष की तरह फल फूल चुका है। यह संघ मुंबई मे धार्मिक, सांस्कृतिक एवं रचनात्मक कार्यक्रमो मे अग्रणीय है।
संघ की मुख्य उपलब्धियां एवं कार्य:
संघ के द्वारा जैन धर्म के भौतिक सिध्दातों, उपदेशों एवं स्थानकवासी श्रमण संघीय मान्यताओं का प्रचार-प्रसार । 2) मेवाड़ संघ के तत्वाधान में मेवाड़ महिला मंडल का गठन किया, जिससे महिला वर्ग में नई जागृती एवं क्रांति का सूत्रपात । 3) युवकों को मेवाड़ संघ, मुंबई के प्रति जोड़ना। 4) हर उपसंघ में अम्बेश गुरु जैन पाठशाला की शुरुआत । 5) मेवाड़ संघ मुंबई में प्रतिवर्ष धार्मिक परिक्षा का आयोजन । 6) साधना सदनों में साधु-सन्तों के चार्तुमास के साथ ही धार्मिक क्रियाओं का आयोजन
संघ एवं समाज के सभी भाई बहनों से मेरा विनम्र निवेदन है कि संघ के कार्यों में रुचि ले और समाज कल्याण के विभिन्न कार्यक्रमा म सक्रिय रूप से भाग ले। यह आपकी संस्था है और इस की प्रगति से पूरे स्थानकवासी श्रमण संघ समाज की प्रगति जुडी हुई है। अब समय आ गया है कि हम एक जुट होकर इस संस्था को तन, मन, धन से सहयोग देकर इसे मजबुत बनावे। इन्हीं आशाओं के साथ.....